मैं हूँ बेटी मरुस्थल की, मुझे आज भी याद आता है बीकानेर

मैं हूँ बेटी मरुस्थल की, मुझे आज भी याद आता है बीकानेर

मुझे आज भी याद आता है बीकानेर, उसकी काली-पिली आंधियां, उजले सुनहरे दिन पर पूरी तरह, पीली गर्द से स्याह होता वो आसमान, हम घबराकर बंद करते दरवाजे खिड़कियां, फिर […]