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WHY I LOVE THE WORLD? #SayYesToTheWorld

 बिलकुल सही बात है कि हमारे आस-पास का संसार हमें जीने की आशाएं देता है. अगर मैं कहूँ कि ये संसार ही है जो हमें जीवन में रचनात्मकता सिखाता है. हमें हमारे अंदरूनी शक्ति का अहसास दिलाता है. हमें पुनर्निर्माण और मजबूती से रहने में भी सहायक होता है.

#SayYesToTheWorld-

हम जब अपने चारों और के वातावरण में रहने वाले मानव, जीव-जन्तुओं और पेड़ पौधों  को देखते हैं तो हमें अहसास होता है कि हम अकेले नहीं हैं.

हमारी ये धरती ये आस्मां बहुत मनभावन वस्तुओं से अलंकृत है. और जब हम घर से बाहर निकलकर यात्रा करते हैं और बहुत विभिन्न जगहों पर जाते हैं तब हमें संगीत के सुरों से सज़ी अलग-अलग मधुर तान जैसे ही लोग मिलते हैं. जो हमे अपनी और आकर्षित करते हैं. प्रकृति के माधुर्य, पक्षियों की चहचहाहट को सुनकर हम खुद में ही खो से जाते हैं.  

जब हम बहते हुए झरने को देखते हैं तो हमें ज्ञात होता है की बहने का नाम ही जिन्दगी है.

नदियाँ साज़ बनाती है

और झरने गीत गाते हैं

ना रुकता ये रोकने पर भी

न बहकता बहकाने पर भी 

झरना तो बस झरना है जानता

नहीं किसी की वो फिर है मानता.

 

इसी तरह हम भी चलते रहें बहते रहें यही जिन्दगी  है. जो रुक गया भला वो जीया कहाँ. एक जगह जमा हुआ तो पानी भी सडन पैदा करता है. जब हम यात्रा करते हैं तब तरह-तरह के लोगों से मिलते हैं. उनकी संस्कृति, उनकी भाषा, उनका व्यवहार, रहन-सहन और भी बहुत कुछ जानते हैं.

तब हमें ये पता चलता है कि ये दुनिया हमारी अपनी छोटी सी बंद दुनिया से कितनी विशाल और आश्चर्यों से भरी है.

Open minded-

यात्रा आप चाहे किसी भी जरिये से करें. जैसे रेलयात्रा, हवाईयात्रा , बस यात्रा या फिर पैदल यात्रा. हर किसी यात्रा से घूम कर आप इसका आनन्द ले सकते हैं. दोस्तों, इन यात्राओं से हमें Travel inspiration मिलता है., हम Open minded होते हैं.

क्योंकि हम बहुत लोगों से बहुत कुछ देखते और सीखते हैं. कई बार ये यात्रा आपको बहुत बड़ा सबक भी दे जाती है. और कई बार जब आप बुरी तरह टूटे होते हैं तो ये यात्रा आपको फिर से जीने की आंतरिक शक्ति भी प्रदान करती है.

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वैसे तो मैंने बचपन से आज तक बहुत यात्राएं की. जिनमे धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक स्थल और मौज-मस्ती की जगहें सभी शामिल हैं. और इन सबका मैंने पूरा लुत्फ़ भी उठाया. लेकिन अगर मैं कहूँ कि मेरी Love the world वाली यात्रा कौनसी रही तो सुनिए मेरी जुबानी-

अगर मुझे कोई पूछे कि मेरी अविस्मरनीय और मेरे दिल के करीब मेरी यात्रा कौनसी है तो मैं आपको अपनी 10 दिवसीय विपश्यना कोर्स की यात्रा के बारे में कहूँगी. जब मैं और मेरे पति  2017 जून के महीने में जयपुर में होने वाले 10 दिवसीय ध्यान शिविर का हिस्सा बने.

और वहां पर अलग-अलग स्थान से आने वाले अनेकों लोगों से मिले. उनमे हर दिशा और देश के लोग ध्यान शिविर में भाग लेने आये थे. उनके विचार, उनकी आप-बीती, उनसे सुख-दुःख सब हमने आपस में साझा किये. 

हमने आपस में एक दूसरे के एड्रेस और ईमेल, तस्वीरें शेयर की. आज भी मैं और मेरे पति उनमे से बहुत लोगों के सम्पर्क में हैं. और ये सब सम्भव हो पाया हमारी यात्रा करने से. और ये यात्रा हमें इतना अभिभूत कर गयी कि हमने बार-बार ऐसी यात्राएं करने का मन बना लिया है. 

हमारी यात्रा में सहयोग देने वाले हर ट्रांसपोर्ट सेवाओं को हम दिल से धन्यवाद देते हैं. दूरी के हिसाब से हर तरह की ट्रांसपोर्ट कम्पनीज हमारे सहयोग के लिए प्रतिपल तैयार हैं. 

दुनिया कितनी बड़ी और खुबसूरत –

उनमे से Lufthansa भी आपको ये खुबसूरत दुनिया देखने में अपना पूरा सहयोग देने को तत्पर है. एक बार इनके साथ ये खुबसूरत दुनिया देखिये और फिर बार-बार इन मनभावन नज़ारों का आनन्द लीजिये. क्योंकि ये दुनिया है ही इतनी खुबसूरत कि आप इसे बार-बार देखना चाहेंगे. 

यात्रा करने से ही हमें ये अहसास हुआ कि ये दुनिया कितनी बड़ी और खुबसूरत है. और मुझे ये पता चला कि मैं इस दुनिया को प्यार क्यू करती हूँ. क्योंकि इस दुनिया ने इसमें रहने वाली हर वस्तु का आनन्द मुझे दिया है. इसके सुख-दुःख, इसके हर परिवर्तन की मैं साझीदार हूँ.

यात्राओं से ही हमारे विचार विस्तृत हए है. मैं तो आपसे भी ये रिक्वेस्ट करुँगी कि आप भी जब भी वक्त मिले यात्रा कीजिये और अपनी झोली खुशियों से भर लीजिये. समेट लीजिये इस दुनिया का हर खुबसूरत पल और झूम जाइए मग्न होकर.

हर लम्हा यादगार बन जाता है

जब

प्रकृति का हर नजारा संग-संग गाता है.

मेरा ये मानना है कि हमारे आस-पास होने वाला हर परिवर्तन हमें भी प्रभावित करता है. इसलिए गम हो या हो ख़ुशी, यात्रा करते रहिये और मस्त रहिये.

2 Comments

    • sabhindime sabhindime Post author | 5th April 2018

      @pushpendra dwivedi
      ji shukriya

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