नर और नारी हैं एक समान

inspiration

ऐसा क्यों लगता है कि नारी नर से भिन्न है ,

नर जो भी करें तो वह मान्य है और

नारी मुस्कुरा भी दे तो वह अमान्य है,

नर और नारी को समझो समान,

तभी तो होगा हर नारी का सम्मान ,

आज की औरत नहीं किसी से कम है,

हर काम वह कर लेती है क्योंकि

उसमें इतना दम है ,

कुछ भी करना, कुछ भी ना करना,

यह उसकी भी तो मर्जी है ,

कुछ भी करने के लिए, आदेश मांगे ,

यह जरूरी तो नहीं,

ऐसा क्यों लगता है कि सब

यह समझते हैं कि औरत बस एक खिलौना है,

वह सिर्फ एक जान है, जिस्म है,

जिस्म की ना कोई इच्छा है ,

ना कोई उसका अरमान है,

जब जो चाहे उसका दिल तोड़े,

जब जो चाहे उससे मन बहलाए,

यह भी भूल जाता है कि

उस को जन्म देने वाली, मां भी तो नारी है,

जो बेटी है वह भी तो एक औरत है

यह समझ के ठेकेदारों ,

कब तक औरत को बेइज्जत करोगे ,

अब तो खुद को संभालो,

आज की नारी को पहचानो,,,

उसके हर रूप की इज्जत करो,

वह सहनशक्ति की प्रतिमा है ,

धैर्य की मिसाल है ,

वक्त आने पर वह चंडी, काली बन जाती है ,

वह ऐसी चिंगारी है, जो राख तुम्हें कर देगी,

ना जगाओ उसके इस काली, चंडी रूप को ,

उसे शीतल ही रहने दो,

वह तो प्यार का सागर है ,

वह आपके घर की लक्ष्मी है ,

वह अन्नपूर्णा है ,

अरे उसके क्या-क्या नाम बताएं,

वह तो अनेक में एक जगत जननी मां है.…..

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